MSP क्या है?
MSP यानी Minimum support price (न्यूनतम समर्थन मूल्य) का अर्थ है वह न्यूनतम मूल्य जिस पर सरकारी एजेंसियां किसानों से उनका अनाज खरीदती है| MSP का निर्धारण सरकार द्वारा फसल की बुआई या उससे पहले ही कर दिया जाता है| सरकारी एजेंसियां MSP से कम कीमत पर फसलों को नहीं खरीद सकती है जबकि इससे ज्यादा कीमत पर वह कृषि उत्पादों को खरीद सकती है| बाजार में फसल की कीमत गिरने के बावजूद भी सरकारी एजेंसियों को फसल निर्धारित MSP पर ही खरीदना पड़ता है| MSP में प्रत्येक वर्ष 1-2% की वृद्धि होती है| सरकार द्वारा वर्तमान समय में कुल 23 फसलों पर एमएसपी दी जाती है जिनमें से 14 खरीफ फसलें, 6 रबी फसलें और 3 अन्य फसलें हैं|
MSP का निर्धारण कौन व कैसे करता है?
MSP का निर्धारण कृषि मंत्रालय के अंर्तगत Commission for Agricultural cost & prices (CACP) द्वारा किया जाता है|CACP, MSP को Cabinet committee on economics affairs(CCEA) को recommend करती है और काम तौर पर CCEA द्वारा इसे मान लिया जाता है|
Union budget 2018-19 में वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली द्वारा यह घोषणा की गई थी कि अब किसानों को उनकी उपज की लागत का डेढ़ गुना MSP के रूप में मिलेगा इस Union budget से पहले MSP का पता लगाने के लिए कई विभिन्न कारकों(Factors) को ध्यान में रखा जाता था किंतु इस Union budget के बाद केवल उपज की लागत(Cost of Production) के आधार पर ही MSP के निर्धारण की बात कही गई|
Cost of Production (उपज की लागत) का पता कैसे चलता है?
विभिन्न किसानों द्वारा उपज की लागत में अंतर होता है| कोई किसान अधिक लागत से फसलों की उपज करता है तो कोई कम लागत के इस्तेमाल से ही फसलों की पैदावार करता है किंतु प्रश्न यह उठता है कि CACP इस उपज की लागत का निर्धारण कैसे करती है? कृषि मंत्रालय के अंतर्गत Directorate of Economics & Statistics प्रत्येक वर्ष कृषि और इससे संबंधित आंकड़े जारी करती है इन्हीं आंकड़ों का इस्तेमाल CACP उपज की लागत द्वारा एमएसपी के निर्धारण में करती है हालांकि Directorate of Economics & Statistics के द्वारा जारी किए गए आंकड़े 3 वर्ष पुराने होते हैं|
क्या होता है A2, A2+FL और C2 cost?
Cost of production के अंतर्गत तीन प्रकार के आंकड़े होते हैं-A2, A2+FL और C2 cost.
A2 -A2 के अंतर्गत फसल को उगाने में लगाई गई लागत मापी जाती है, जैसे- खाद, उर्वरक, श्रम इत्यादि पर किया गया खर्च| A2 का निर्धारण state wise और All India level पर किया जाता है|
A2+FL - इसके अंतर्गत unpaid family labour को शामिल किया जाता है अर्थात यदि किसी किसान के परिवार के सदस्य ही उसकी फसलों की देखभाल इत्यादि करें तो उसे किराए पर Labour की आवश्यकता नहीं पड़ेगी| घर के लोगों को अपने श्रम का मूल्य नहीं मिलता इसीलिए A2+FL के अंतर्गत इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि परिवार के सदस्यों को भी अपने श्रम का उचित मूल्य मिल सके जिससे कि किसानों को किराए पर श्रमिकों को बुलाने की आवश्यकता ना पड़े|
C2 -कई किसानों के पास स्वयं की जमीन नहीं होती वह किराए पर जमीन को लेकर खेती करते हैं जिसका वे किराया भी चुकाते हैं| C2 में खेती की जमीन का किराया और खेती में काम में लाई गई पूंजी के ब्याज को भी शामिल किया जाता है|
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